
भगवान ने कहा है कि, ‘आत्मज्ञान समझो।’ ‘आत्मज्ञान’ और ‘केवलज्ञान’ में बहुत ज़्यादा अंतर है ही नहीं। यदि ‘आत्मज्ञान’ को समझ लिया तो वह ‘कारण केवलज्ञान’ है और ‘केवलज्ञान’, ‘कार्य केवलज्ञान’ है!
परम पूज्य दादा भगवानचैतन्य अविनाशी है और अचेतन भी अविनाशी है, लेकिन चैतन्य को तत्त्व स्वरूप से जानना है और तत्त्व स्वरूप से ही अविनाशीपन को समझना है!
परम पूज्य दादा भगवानविनाशी चीज़ों की मुद्दत होती है, अविनाशी वस्तु की मुद्दत नहीं होती। विनाशी को विनाशी समझने वाला ‘अविनाशी’ होता है!
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