
चिंता ही संसार का सब से बड़ा बीज है। क्योंकि चिंता सब से बड़ा अहंकार है। अहंकार चला गया तो चिंता गई।
परम पूज्य दादा भगवानसंसार अर्थात् राग-द्वेष वाली दृष्टि, जबकि वीतराग दृष्टि से मोक्ष है। वीतराग दृष्टि का मापदंड क्या है? यही कि पूरा जगत् निर्दोष दिखाई दे।
परम पूज्य दादा भगवानसंसार में अन्य कुछ न आए, उसमें दिक्कत नहीं है। लेकिन ‘एडजस्ट’ होना तो आना ही चाहिए। यदि सामने वाला ‘डिसएडजस्ट’ होता रहे और आप ‘एडजस्ट’ होते रहोगे तो संसार के पार उतर जाओगे।
परम पूज्य दादा भगवान‘एडजस्ट एवरीव्हेर’, यह वाक्य आपके संसार को ‘टॉप’ पर ले जाएगा। व्यवहार को भी ‘टॉप’ पर ले जाए बिना कोई मोक्ष में नहीं गया है। व्यवहार आपको छोड़े नहीं, उलझाता रहे तो आप क्या करोगे? इसलिए व्यवहार को फटाफट सुलझा दो।
परम पूज्य दादा भगवानइस जगत् के न्यायाधीश तो जगह-जगह बैठे होते हैं। लेकिन कर्म के न्यायाधीश तो एक ही हैं। ‘भुगते उसकी भूल’! यही एक ऐसा न्याय है, जिससे पूरा जगत् चल रहा है और भ्रांति के न्याय से पूरा ही संसार खड़ा है!
परम पूज्य दादा भगवानमोक्ष मार्ग मुश्किल नहीं है। संसार मार्ग मुश्किल है। सब से आसान है मोक्ष मार्ग। खिचड़ी बनाना भी उससे ज़्यादा मुश्किल है!
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