
भगवान कौन हैं? जो शरीर होने के बावजूद भी शरीर के मालिक नहीं हैं, मन के मालिक नहीं हैं, वाणी के मालिक नहीं हैं, किसी भी चीज़ के मालिक नहीं हैं, वे इस जगत् में भगवान हैं!
परम पूज्य दादा भगवानदेह की सभी क्रियाओं में अज्ञानी का आत्मा भी जुदा रह सकता है। यहाँ पर खाना खा रहा होता है लेकिन खुद होता है ‘ऑफिस’ में! मन की क्रिया से और वाणी की क्रिया से अलग नहीं रह पाता!
परम पूज्य दादा भगवानवचनबल कैसे प्राप्त होता है? एक भी शब्द का उपयोग मज़ाक के लिए नहीं किया हो, एक भी शब्द का उपयोग झूठे स्वार्थ या किसी से कुछ ऐंठने के लिए नहीं हुआ हो, वाणी का दुरुपयोग नहीं किया हो, खुद का मान बढ़ाने के हेतु से वाणी का उपयोग नहीं किया हो, तब वचनबल सिद्ध होता है!
परम पूज्य दादा भगवानहमारे कारण सामनेवाले को परेशानी हो, ऐसा बोलना सब से बड़ा गुनाह है। किसी ने ऐसा उल्टा कहा हो तो उसे दबा देना चाहिए, वही इंसान कहलाता है!
परम पूज्य दादा भगवानजहाँ स्यादवाद वाणी है वहाँ आत्मज्ञान है। जहाँ एकांतिक वाणी है वहाँ आत्मज्ञान नहीं है।
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