
संसार अर्थात् राग-द्वेष वाली दृष्टि, जबकि वीतराग दृष्टि से मोक्ष है। वीतराग दृष्टि का मापदंड क्या है? यही कि पूरा जगत् निर्दोष दिखाई दे।
परम पूज्य दादा भगवान‘एडजस्ट एवरीव्हेर’, यह वाक्य आपके संसार को ‘टॉप’ पर ले जाएगा। व्यवहार को भी ‘टॉप’ पर ले जाए बिना कोई मोक्ष में नहीं गया है। व्यवहार आपको छोड़े नहीं, उलझाता रहे तो आप क्या करोगे? इसलिए व्यवहार को फटाफट सुलझा दो।
परम पूज्य दादा भगवानमोक्ष मार्ग मुश्किल नहीं है। संसार मार्ग मुश्किल है। सब से आसान है मोक्ष मार्ग। खिचड़ी बनाना भी उससे ज़्यादा मुश्किल है!
परम पूज्य दादा भगवानमोक्ष तो, जब तक शुद्धता उत्पन्न नहीं हो जाती, तब तक नहीं हो सकता। शुद्धता के लिए ‘मैं कौन हूँ’ का भान होना चाहिए।
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