
संसार अर्थात् राग-द्वेष वाली दृष्टि, जबकि वीतराग दृष्टि से मोक्ष है। वीतराग दृष्टि का मापदंड क्या है? यही कि पूरा जगत् निर्दोष दिखाई दे।
परम पूज्य दादा भगवान‘मोक्ष में जाते हुए विघ्न अनेक प्रकार के होने से उनके सामने ‘शुद्ध चेतन’ अनंत शक्ति वाला है!’ ये विघ्न तो माया के हैं!!
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