‘जिनमुद्रा’ क्या कहती है? वीतरागों की पद्मासन मुद्रा, हाथों-पैरों की एक पर एक रखी हुई मुद्रा उपदेश देती है कि, ‘‘हे मनुष्यों! अगर समझदारी है तो समझ जाओ। आपका खाना-पीना, ज़रूरत की हरएक चीज़ आप लेकर ही आए हो, इसलिए ‘मैं कर्ता हूँ’ यह भान छोड़ देना और मोक्ष का प्रयत्न करना"!